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चोपना क्षेत्र में मातृभाषा में शिक्षा से वंचित बंगाली समुदाय

rahul
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 मातृभाषा में शिक्षा से वंचित बंगाली समुदाय, चोपना क्षेत्र में



आज जब CBSE ने त्रिभाषा की पहल की अब देखना है चोपना पुनर्वास क्षेत्र में बंगला भाषा शुरू होता है की नहीं

बैतूल जिले के चोपना पुनर्वास क्षेत्र में निवासरत बंगाली समुदाय के बच्चों को वर्षों से उनकी मातृभाषा बांग्ला में शिक्षा नहीं मिल पाने के कारण समाज में गहरा आक्रोश व्याप्त है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति और संविधान जहां मातृभाषा में प्रारंभिक शिक्षा को बच्चों का मूल अधिकार मानते हैं, वहीं चोपना क्षेत्र में यह अधिकार आज भी केवल कागज़ों तक सीमित दिखाई दे रहा है।

जानकारी के अनुसार, जब क्षेत्र के स्कूलों का संचालन पुनर्वास विभाग के अधीन था, तब कक्षा पहली से आठवीं तक विद्यार्थियों को बांग्ला भाषा की पढ़ाई कराई जाती थी। इससे बंगाली समुदाय के बच्चे अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं से जुड़े रहते थे। लेकिन स्कूलों का संचालन आदिम जाति कल्याण विभाग को सौंपे जाने के बाद बांग्ला विषय की पढ़ाई अचानक बंद कर दी गई। तब से लेकर आज तक इस विषय को पुनः प्रारंभ करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

स्थानीय नागरिकों और समाज के वरिष्ठजनों का कहना है कि मातृभाषा में शिक्षा बच्चों के मानसिक, बौद्धिक और सामाजिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक होती है। नई शिक्षा नीति में भी मातृभाषा को प्राथमिकता दी गई है, लेकिन चोपना क्षेत्र में इन नियमों और नीतियों की अनदेखी की जा रही है। इससे नई पीढ़ी धीरे-धीरे अपनी मातृभाषा और सांस्कृतिक पहचान से दूर होती जा रही है।



बंगाली समाज द्वारा कई बार जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों एवं शासन स्तर पर ज्ञापन सौंपकर स्कूलों में पुनः बांग्ला भाषा शुरू कराने की मांग की गई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। जमीनी स्तर पर आज तक कोई निर्णय लागू नहीं हो पाया है।

समाज के लोगों का कहना है कि यदि शासन वास्तव में पुनर्वास एवं आदिवासी क्षेत्रों के बच्चों के विकास को लेकर गंभीर है, तो मातृभाषा में शिक्षा का अधिकार तत्काल लागू किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि बंगाली समुदाय के साथ हो रही यह उपेक्षा सामाजिक एवं शैक्षणिक अन्याय के समान है।

बंगाली समाज ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही स्कूलों में बांग्ला भाषा की पढ़ाई पुनः प्रारंभ नहीं की गई, तो बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। लोगों का कहना है कि सरकार सबका साथ, सबका विकासकी बात तो करती है, लेकिन चोपना पुनर्वास क्षेत्र के बंगाली समुदाय को उनके मूल शैक्षणिक अधिकार से वंचित रखा गया है।

अब देखना यह होगा कि शासन और प्रशासन इस वर्षों पुरानी मांग पर संवेदनशीलता दिखाता है या फिर बंगाली समुदाय के बच्चों का भविष्य यूँ ही उपेक्षा का शिकार बना रहेगा। 

मातृभाषा में शिक्षा हर बच्चे का अधिकार
বাংলা ভাষার শিক্ষা ফিরিয়ে দাও

📚 चोपना पुनर्वास क्षेत्र के बंगाली समाज की मांग
✅ बांग्ला भाषा की पढ़ाई पुनः प्रारंभ करो
✅ मातृभाषा में शिक्षा का संवैधानिक अधिकार लागू करो
✅ बच्चों का भविष्य और संस्कृति बचाओ

“मातृभाषा से ही बच्चे का सर्वांगीण विकास संभव है”
“নিজের ভাষা, নিজের পরিচয়”

📍 बंगाली समाज – चोपना पुनर्वास क्षेत्र, जिला बैतूल

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