महिला किसान दिवस के अवसर पर ग्राम धराव पड़ाव में कृषि विज्ञान केंद्र, गोविंदनगर द्वारा जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में केंद्र की पोषण एवं आहार विशेषज्ञ डॉ. आकांक्षा पाण्डेय ने ग्रामीण महिलाओं को “जैविक कृषि में महिलाओं की भूमिका” विषय पर विस्तृत जानकारी प्रदान की।
डॉ. आकांक्षा ने अपने उद्बोधन में बताया कि महिलाएँ भारतीय कृषि की रीढ़ हैं और खेतों से लेकर घर तक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। उन्होंने कहा कि महिलाएँ न केवल बीज संरक्षण, खाद एवं कीटनाशक के जैविक विकल्प तैयार करने में सक्षम हैं, बल्कि रसोई और खेत को जोड़कर पोषण-सुरक्षित परिवार निर्माण में भी अग्रणी भूमिका निभा सकती हैं।
उन्होंने उपस्थित महिलाओं को जैविक खाद, जीवामृत, घनजीवामृत, और नीमास्त्र जैसे प्राकृतिक संसाधनों के निर्माण एवं उपयोग की विधियाँ समझाईं। साथ ही, यह भी बताया कि जैविक खेती से मिट्टी की उर्वरक क्षमता बनी रहती है, फसल की गुणवत्ता बढ़ती है और उत्पादन लागत घटती है।
इस अवसर पर ग्रामीण महिलाओं ने भी अपने अनुभव साझा किए और जैविक खेती अपनाने की दिशा में अपनी रुचि व्यक्त की। कार्यक्रम में लगभग 40 से अधिक महिला किसानों की सक्रिय सहभागिता रही। कार्यक्रम के अंत में डॉ. आकांक्षा पाण्डेय ने महिलाओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि — “अगर महिलाएँ जैविक कृषि को आत्मसात करेंगी, तो गाँव-गाँव में स्वस्थ समाज और समृद्ध कृषि की नींव रखी जा सकेगी।” कार्यक्रम का संचालन ग्राम के कृषक मित्र द्वारा किया गया एवं अंत में आभार प्रदर्शन ग्राम पंचायत प्रतिनिधि द्वारा किया गया।

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