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सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग मिलने से ग्रामीण महिलाएं भी कृषि क्षेत्र में सफल उद्यमी बन सकती हैं : डॉ. पाण्डेय

rahul
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वैश्विक सम्मेलन में कृषि विज्ञान केंद्र गोविंदनगर का प्रतिनिधित्व

भारत की राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं की भूमिका पर आयोजित वैश्विक सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में सहभागिता की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और उन्हें केवल खेतों तक सीमित न रखकर नीति निर्माण, निर्णय प्रक्रिया तथा नेतृत्व के पदों में भी अधिक अवसर दिए जाने चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं के सशक्तिकरण से कृषि-खाद्य प्रणालियाँ अधिक समावेशी, टिकाऊ और प्रभावी बन सकती हैं।

इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में भाऊसाहब भुस्कुटे स्मृति लोक न्यास के कृषि विज्ञान केंद्र, गोविंदनगर (जिला नर्मदापुरम) का भी प्रतिनिधित्व रहा। केंद्र की पोषण एवं आहार विशेषज्ञ डॉ. आकांक्षा पाण्डेय ने कार्यक्रम में सहभागिता करते हुए महिलाओं की पोषण सुरक्षा, कृषि-आधारित उद्यमिता और ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी से जुड़े विषयों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को पोषण, खाद्य प्रसंस्करण, मशरूम उत्पादन तथा अन्य कृषि-आधारित गतिविधियों का प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है।

कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र गोविंदनगर की हितग्राही एवं सफल मशरूम उत्पादक श्रीमती मीता ठाकुर ने भी सहभागिता की। श्रीमती मीता ठाकुर ने कृषि विज्ञान केंद्र से प्राप्त प्रशिक्षण के आधार पर मशरूम उत्पादन को स्वरोजगार के रूप में अपनाया है और आज वे अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही हैं। उन्होंने सम्मेलन में अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग मिलने से ग्रामीण महिलाएं भी कृषि क्षेत्र में सफल उद्यमी बन सकती हैं।

सम्मेलन में विभिन्न देशों और संस्थानों से आए विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों तथा महिला उद्यमियों ने कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने, तकनीकी सशक्तिकरण, पोषण सुरक्षा तथा सतत कृषि विकास से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया।

कृषि विज्ञान केंद्र गोविंदनगर के लिए यह सहभागिता गर्व का विषय रही, जिससे यह स्पष्ट होता है कि केंद्र द्वारा ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयास राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहे जा रहे हैं।

 



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