स्कूली बच्चों का कहना है, सड़क नहीं तो स्कूल नहीं जाएंगे
विकास के दावों के बीच एक ऐसा सड़क मार्ग आज भी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है, जिसके निर्माण की मांग ग्रामीण पिछले करीब 50 वर्षों से करते आ रहे हैं। लखिपुर से झोली-1 तक लगभग 3 किलोमीटर लंबे इस मार्ग के निर्माण की मांग वर्ष 1970 से की जा रही है, लेकिन पांच दशक बीत जाने के बाद भी ग्रामीणों को पक्की सड़क की सुविधा नहीं मिल सकी है।
यह मार्ग क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे लगभग 14 गांव सीधे जुड़े हुए हैं और इन गांवों के लोगों को आवश्यक कार्यों, बाजार, स्वास्थ्य सुविधाओं तथा अन्य जरूरतों के लिए चोपना पहुंचना पड़ता है। सड़क खराब होने के कारण ग्रामीणों को रोजाना भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
आवेदन पर आवेदन, फिर भी नहीं बनी सड़क
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण को लेकर वे वर्षों से लगातार जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों के अधिकारियों को आवेदन एवं ज्ञापन देते आ रहे हैं। हर बार आश्वासन मिलता है, लेकिन सड़क निर्माण की दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। इतने लंबे समय में कई सरकारें आईं और चली गईं, अनेक जनप्रतिनिधि बदले, लेकिन लखिपुर–झोली-1 मार्ग की समस्या जस की तस बनी हुई है।
ग्रामीणों के अनुसार सबसे गंभीर बात यह है कि पिछले दो दशकों से इस क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी का राजनीतिक प्रभाव रहा है और क्षेत्र के अधिकांश ग्रामीण भाजपा समर्थक हैं। इसके बावजूद लंबे समय से चली आ रही इस सड़क की समस्या का समाधान नहीं हो पाना ग्रामीणों के लिए निराशा का विषय बना हुआ है।
पैदल चलना भी मुश्किल
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की स्थिति अब इतनी खराब हो चुकी है कि इस मार्ग पर पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है। जगह-जगह गड्ढे, उबड़-खाबड़ रास्ता और बारिश के समय कीचड़ के कारण आवागमन बेहद कठिन हो जाता है। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीण व्यंग्य करते हुए कहते हैं कि “सड़क की हालत देखकर मवेशी भी इस रास्ते से चलना पसंद नहीं करेंगे।”
स्कूली बच्चों की भी मजबूरी
इस सड़क की बदहाली का सबसे अधिक असर स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है। आसपास के गांवों के विद्यार्थी इसी मार्ग से होकर हाई सेकेंडरी स्कूल चोपना अध्ययन के लिए जाते हैं। खराब सड़क के कारण विद्यार्थियों को बारिश और अन्य मौसम में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अभिभावकों को भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है।
अब ग्रामीणों ने फिर उठाई आवाज
लगातार उपेक्षा से परेशान ग्रामीणों ने एक बार फिर जनप्रतिनिधियों के समक्ष सड़क निर्माण की मांग रखी है। ग्रामीणों का कहना है कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि सड़क निर्माण के लिए ठोस कदम उठाया जाना चाहिए।
ग्रामीणों ने मांग की है कि लखिपुर से झोली-1 तक लगभग 3 किलोमीटर मार्ग का सर्वे कराकर शीघ्र स्वीकृति दी जाए और सड़क का निर्माण कराया जाए, ताकि 14 गांवों के हजारों लोगों को आवागमन की बेहतर सुविधा मिल सके।
पांच दशक से लंबित यह मांग अब केवल सड़क निर्माण की मांग नहीं, बल्कि क्षेत्र के ग्रामीणों के बुनियादी अधिकार और विकास से जुड़ा सवाल बन चुकी है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस बार उनकी आवाज जनप्रतिनिधियों और प्रशासन तक पहुंचेगी और 50 वर्षों से चला आ रहा इंतजार खत्म होगा।



